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बद्रीकाश्रम स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने लिया था लोहा
By admin On 25 Jun, 2013 At 09:42 AM | Categorized As Religion, Spiritualism | With 0 Comments

हरिद्वार। दुनिया भर के सनातनियों को धर्म और संस्कृति का मार्ग दिखाने वाले शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने अपनी युवावस्था में देश को आजादी दिलाने की लड़ाई भी लड़ी थी। अंग्रेजी हुकुमत के खिलाफ महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन में स्वामी स्परूपानंद ने बढ़चढ़ कर भाग लिया। 18 साल की उम्र में स्वामी स्वरूपानंद ने जंग-ए-आजादी का सिपाही बनकर संघर्ष किया। 1942 में स्वामी स्वरूपानंद को अंग्रेजी सरकार ने गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया। स्वामी स्वरूपानंद वाराणसी जेल में 9 महीने जेल में रहे। जेल में रहने के दौरान कांग्रेस से जुड़े कई दिग्गज नेताओं के साथ उनकी जान पहचान हुई। जेल में रहने के दौरान ही उनकी मुलाकात पं. जवाहर लाल नेहरु के साथ हुई थी। नौ महीने वाराणसी जेल में रहने के बाद उन्हें मध्य प्रदेश भेज दिया गया। यहां वह छह महीने जेल में रहे। जेल से छूटने के बाद भी स्वामी स्वरूपानंद देश की आजादी के लिए संघर्ष करते रहे। एक्स्रपेस इंडियन डॉट कॉम को दी गई जानकारी में खुद स्वामी स्वरूपानंद ने बताया कि वह पंद्रह महीने जेल में रहे। भारत छोड़ो आंदोलन में वह महात्मा गांधी के विचारों से काफी प्रभावित हुए।

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